Ghansyam Sharma / Thu, May 22, 2025 / Post views : 168
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
कोण्डागांव जिले में वन क्षेत्र के भीतर एक ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से डामर प्लांट स्थापित करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिससे न केवल पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है, बल्कि वन विभाग की लापरवाही भी उजागर हुई है। यह प्लांट शहर के समीप ग्राम चिखलपुटी के नवीन बस स्टैंड के पीछे स्थित आरक्षित वन क्षेत्र खुटडोबरा के कक्ष क्रमांक आरएफ-444 में लगाया गया है।
वन नियमों की खुली अवहेलना
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार, डामर प्लांट जैसे प्रदूषणकारी संयंत्रों को आरक्षित वन, राष्ट्रीय उद्यान, और वन्यजीव अभयारण्यों से कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यह शहरी सीमा से कम से कम दो किलोमीटर और ग्रामीण बस्तियों व राजमार्गों से भी पर्याप्त दूरी पर होना अनिवार्य है। मगर यहां पर सारे नियम ताक पर रख दिए गए हैं।
पेड़ों की कटाई और आंख मूंदे विभाग
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार कन्हैयालाल अग्रवाल ने बाईपास निर्माण कार्य के लिए लगभग आधा से एक एकड़ क्षेत्र में घने साल के पेड़ों की कटाई करवाई और उसी जमीन पर डामर प्लांट स्थापित कर दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्य 10 से 15 दिनों तक चलता रहा, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि विभागीय कार्यालय की दूरी प्लांट से केवल दो किलोमीटर है, जो इस मामले में विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
विभागीय प्रतिक्रियाएं – अलग-अलग दावे
मामले के सामने आने के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी बी.एन. शर्मा ने दावा किया कि डामर प्लांट आरक्षित वन क्षेत्र में नहीं, बल्कि किसान की निजी भूमि पर लगाया गया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उक्त भूमि पर पेड़ किसकी अनुमति से काटे गए।
वहीं, वन मंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि प्लांट आरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से स्थापित किया गया है, तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्नों के घेरे में विभाग
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है – क्या वन विभाग को इस गतिविधि की जानकारी नहीं थी, या उन्होंने जानबूझकर आंखें मूंद लीं? अगर विभाग को जानकारी थी और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका को जन्म देता है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि विकास कार्यों की आड़ में वन संपदा का ऐसा दोहन भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है। वे मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
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