Ghansyam Sharma / Sat, Oct 24, 2026 / Post views : 48
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा कोण्डागांव के ऑडिटोरियम में पारंपरिक वैद्य स्वैच्छिक प्रमाणन एवं प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के 309 पारंपरिक वैद्यों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके पारंपरिक ज्ञान, अनुभव और सेवाभाव का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारंपरिक वैद्यों का ज्ञान पीढ़ियों के अनुभव और प्राकृतिक वनस्पतियों की पहचान पर आधारित है। इस ज्ञान का दस्तावेजीकरण जरूरी है, ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन और स्थानीय वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया।
बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि प्रमाणन के प्रथम चरण में 309 वैद्यों को प्रमाण पत्र दिए गए हैं। बोर्ड का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक प्रदेश के एक हजार पारंपरिक वैद्यों का प्रमाणन पूरा करना है। उन्होंने औषधीय वनस्पतियों के व्यवस्थित संग्रहण और संरक्षण के लिए वन विभाग एवं वैद्यों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही।
कोण्डागांव विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी ने पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, स्थानीय अनाज और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने वैद्यों से अपने अनुभव नई पीढ़ी के साथ साझा करने की अपील की।
कार्यक्रम में बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में पारंपरिक वैद्य उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का संरक्षण, वैद्यों के ज्ञान का दस्तावेजीकरण और औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
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