Ghansyam Sharma / Fri, Dec 26, 2025 / Post views : 255
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
कोंडागांव जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम हिर्री से निकलकर बालिका योगिता मण्डावी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जूडो खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। योगिता की सफलता पर जिला प्रशासन सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
योगिता मण्डावी का जन्म 1 जनवरी 2011 को छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के ग्राम हिर्री में हुआ। बचपन से ही उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। मात्र चार वर्ष की आयु में माता-पिता के निधन के बाद वे चाचा-चाची के संरक्षण में रहीं। वर्ष 2021 में जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें बालगृह बालिका, कोंडागांव में प्रवेश दिलाया गया, जहां से उनके जीवन को नई दिशा मिली।
वर्तमान में योगिता स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, कोंडागांव में कक्षा 9वीं की छात्रा हैं। बालगृह में रहने के दौरान उन्होंने 10 वर्ष की उम्र में जूडो खेल को अपनाया और कठिन अभ्यास व अनुशासन के बल पर बहुत कम समय में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने राज्य स्तर पर पदक जीतकर सबका ध्यान आकर्षित किया।
वर्ष 2024 में दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय शालेय जूडो प्रतियोगिता में योगिता ने स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा खेलो इंडिया क्षेत्रीय प्रतियोगिता, नासिक में रजत तथा खेलो इंडिया राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता, केरल में भी रजत पदक हासिल किया। वर्ष 2025 में राज्य स्तरीय ओपन व शालेय जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही राष्ट्रीय ओपन जूडो प्रतियोगिता, हैदराबाद में कांस्य पदक प्राप्त कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया।
मात्र 14 वर्ष की आयु में योगिता आज एक राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी हैं और वर्तमान में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि कठिन हालात भी मजबूत हौसलों के आगे टिक नहीं पाते।
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