Ghansyam Sharma / Tue, Jul 5, 2022 / Post views : 163
कोंडागांव पत्रिका लुक।
कहते हैं मजदूरों का पसीना सूखने से पहले मजदूरों के हाथ मे उसकीखून पसीने की कमाई के पैसे का भुगतान हो जाना चाहिए लेकिन 6 मह बीत जाने के बाद भी मजदूरों का भुगतान अब तक नहीं। मामला वन परिक्षेत्र अमरावती का हैं। अमरावती वन परिक्षेत्र में कार्य करने वाले मजदूर दैनिक समाचार कार्यालय पहुँचर शिकायत की साथ ही कलेक्टर के नाम का आवेदन बनाने की गुजारिश की ।
क्या हैं पूरा मामला
वन परिक्षेत्र अमरावती के रेंजर-डिप्टी रेंजर द्वारा अपने वन परिक्षेत्र में विभिन्न तरह के मजदूरी कार्य करवाने के बाद मजदूरी भुगतान नहीं कर रहे होने के कारण परेषान मजदूरों द्वारा 05 जुलाई 2022 को जन चैपाल में पहुंचकर कलेक्टर कोण्डागांव से शिकायत करके जल्द से जल्द भुगताने कराने की मांग करने का मामला सामने आया है। परेशान मजदूरों ने अपने आवेदन में लेख किया है कि वे सभी जिला व तहसील कोण्डागांव के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामों कावरा, खूटबेड़ा, बवई, अमरावती, घोड़सोड़ा, बेलगांव, बीजापुर, बड़ेकनेरा आदि के मूलनिवासी आदिवासी एवं अन्य जाति वर्ग के गरीबजन हैं और खेती बाड़ी के अलावा मजदूरी करके अपना और अपने पर आश्रितों का जीवनयापन करते हैं।

वन परिक्षेत्र अमरावती के वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अन्य वन कर्मचारियों के द्वारा लगभग 6 माह पूर्व से उन सभी मजदूरों से अपने वन परिक्षेत्र में विभिन्न कार्यों में मजदूरी का कार्य का कराया जा रहा था। मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने से वर्तमान में उन्होंने मजदूरी का काम करना बंद कर दिया है। अब वन परिक्षेत्र प्रभारी रेंजर एवं डिप्टी रेंजर से मजदूरी का भुगतान करने को कहने पर कहते हैं कि शासन से ही उक्त कार्यों का राशि नहीं आ रहा है, तो हम मजदूरी का भुगतान कहां से करेंगे। जबकि हम मजदूरों में से प्रत्येक मजदूरों की मजदूरी लगभग 15 हजार से लेकर 35 हजार रुपए तक हो रहा है। वर्तमान में खेतीबाड़ी का मौसम है और हम सभी अपने-अपने खेतों में काम कर रहे हैं और हमें खेतीबाड़ी के लिए रकम की भी आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि हमारे द्वारा कई माह से किए जा रहे मजदूरी का भुगतान समय पर हो जाए तो उसका उपयोग हमारे द्वारा खेती बाड़ी में किया जा सकता है। वन परिक्षेत्र अमरावती के वन क्षेत्र में विभिन्न कार्यों में किए गए मजदूरी कार्य का नहीं किए जा रहे मजदूरी का भुगतान जल्द से जल्द करवाने का आग्रह किया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि नव नियुक्त कलेक्टर दीपक सोनी उक्त परेशान मजदूरों द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर क्या और कब तक कार्यवाही करा पाते हैं ? वहीं वन परिक्षेत्र अमरावती के वन क्षेत्र में विभिन्न कार्यों में किए गए मजदूरी कार्य का मजदूरी भुगतान नहीं किए जाने का जो मामला सामने आया है, उससे ऐसा प्रतित होता है कि वन प्रषासन में बैठे अधिकारी-कर्मचारी ही आमजनों का आर्थिक षोशण करने पर आमदा हो गए हैं। ऐसा कैसे सम्भव है कि शासन द्वारा कराए गए प्रस्तावित कार्य में लगे मजदूरों को मजदूरी भुगतान हेतु राशि न दी जा रही हो ? यदि ऐसा है तो क्या षासन भी मजदूरों के शोषण के लिए भागीदार है ? जोकि सम्भव नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन