Ghansyam Sharma / Thu, Jan 1, 2026 / Post views : 350
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिले में लगातार सामने आ रहे वनों की अवैध कटाई के मामलों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कोंडागांव वन मंडल के माकड़ी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम हड़ीगांव से लगे वन क्षेत्र में कूप कटाई की आड़ में बड़े पैमाने पर साल वनों की कटाई किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सब वन परिक्षेत्र अधिकारी की लापरवाही और मैदानी अमले की निष्क्रियता के कारण संभव हो पाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, जिस क्षेत्र में सीमित और नियंत्रित कूप कटाई की अनुमति थी, वहां सैकड़ों साल के परिपक्व पेड़ों को काट दिया गया। जंगल में फैले कटे हुए ठूंठ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां नियमों को दरकिनार कर व्यापक स्तर पर वन कटाई हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि बिना विभागीय जानकारी और संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई संभव नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जंगल कट रहे थे, तब वन विभाग का मैदानी अमला और परिक्षेत्र अधिकारी कहां थे। यदि समय पर निगरानी और कार्रवाई होती, तो अवैध कटाई को रोका जा सकता था। अब जबकि मामला उजागर हो चुका है, तो जांच के नाम पर केवल औपचारिक कार्रवाई की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और असंतोष है।
वन विभाग की ओर से सफाई दी जा रही है कि क्षेत्र में कूप कटाई स्वीकृत थी और नियमानुसार पेड़ों की मार्किंग के बाद ही कटाई की जाती है। हालांकि, जमीनी हालात विभागीय दावों के विपरीत नजर आ रहे हैं। इससे यह आशंका भी गहराती जा रही है कि कहीं इस पूरे मामले में निचले कर्मचारियों या ग्रामीणों को ही जिम्मेदार न ठहरा दिया जाए।
इस संबंध में वन मंडलाधिकारी कोंडागांव चूड़ामणि सिंह ने कहा है कि अवैध वन कटाई के मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बहरहाल, यह मामला केवल अवैध कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वन संरक्षण व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करता है। यदि वन परिक्षेत्र अधिकारी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो जंगलों का यह विनाश भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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