Ghansyam Sharma / Sat, Sep 6, 2025 / Post views : 185
अधिकारियों की मनमानी से पारदर्शिता पर सवाल
कोंडागांव।
सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही की रीढ़ माना जाता है, लेकिन कोंडागांव में यह कानून मजाक बनकर रह गया है। जिले के अधिकारी न सिर्फ समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे, बल्कि अपीलीय अधिकारी के आदेश की भी खुली अवहेलना कर रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता पुनम दास मानिकपुरी ने बताया कि उन्होंने 3 जून 2025 को उपसंचालक कृषि कार्यालय में आवेदन लगाया था। समय सीमा पूरी होने के बाद उन्होंने प्रथम अपील की, जिस पर संयुक्त संचालक कृषि ने 10 दिन के भीतर निःशुल्क जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया। बावजूद इसके, आदेश को महीना बीतने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ सूचना के अधिकार की अवहेलना ही नहीं, बल्कि उच्चाधिकारियों के आदेश की भी अनदेखी है। आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि अपीलीय अधिकारी जब आदेश पारित करें तो उसके साथ यह भी सुनिश्चित करें कि संबंधित जन सूचना अधिकारी की सर्विस बुक में लाल स्याही से दर्ज किया जाए और इस कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाए। ताकि आम लोग भी देख सकें कि किस अधिकारी ने अधिनियम का पालन नहीं किया और भविष्य में अधिकारियों पर दबाव बने।
फिलहाल स्थिति यह है कि आवेदकों को अंततः राज्य सूचना आयोग का दरवाज़ा खटखटाना पड़ता है। ऐसे में सूचना का अधिकार अधिनियम, जिसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता लाना था, कोंडागांव में अधिकारियों की उदासीनता और मनमानी के कारण अपनी सार्थकता खोता दिख रहा है।
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