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: कोंडागांव में जल जीवन मिशन बदहाल, नवनिर्मित टंकियां टेस्टिंग में ही रिसीं..

Ghansyam Sharma / Tue, Aug 26, 2025 / Post views : 226

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जल जीवन मिशन योजना बदहाल

कोण्डागांव। पत्रिका लुक
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। लेकिन कोंडागांव जिले में इस योजना की तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजना का क्रियान्वयन बदहाल स्थिति में है। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से हुए भ्रष्टाचार के कारण नवनिर्मित पानी टंकियां टेस्टिंग से पहले ही रिसने लगी हैं। वहीं, पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद ग्रामीणों को नलों में पानी तक नसीब नहीं हो रहा।

भ्रष्टाचार का खेल

ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन योजना आम जनता के लिए राहत की बजाय अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। खंडाम गांव में हाल ही में बनी पानी टंकी का निर्माण गुणवत्ता विहीन रहा। टंकी के टेस्टिंग के दौरान ही जगह-जगह से पानी रिसने लगा और दीवारों से छड़ें बाहर निकल आईं। यही नहीं, निर्माण स्थल पर जानकारी देने वाला बोर्ड तक नहीं लगाया गया।

अधूरा काम, बढ़ी परेशानी

कुछ गांवों में पानी टंकी और पाइपलाइन का काम तो पूरा कर दिया गया है। घरों में कनेक्शन भी दे दिए गए, लेकिन नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आ रही। वहीं, पाइप बिछाने के लिए जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में भी परेशानी हो रही है। टेस्टिंग के दौरान हुकिंग कर बिजली का उपयोग किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

शिकायतों पर ध्यान नहीं

ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि अधिकारी शिकायत सुनने के बजाय ठेकेदारों के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं। योजना की खामियों को छिपाने के लिए विभाग द्वारा नवनिर्मित टंकियों की मरम्मत का दावा किया जा रहा है, जबकि शुरुआत से ही गुणवत्तापूर्ण निर्माण किया जाता तो ऐसी नौबत नहीं आती।

सरकार खर्च कर रही करोड़ों, फिर भी वंचित लोग

जल जीवन मिशन के तहत केंद्र और राज्य सरकार ग्रामीणों तक नल-जल कनेक्शन देने के लिए करोड़ों रुपए की राशि आवंटित कर रही है। उद्देश्य था कि हर घर तक नल से साफ पानी पहुंचे। लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते योजना का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। कई गांवों के लोग आज भी पुराने ढर्रे पर कुएं, हैंडपंप या नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों की नाराज़गी

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और विभाग केवल कागजों में काम दिखा रहे हैं। जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। अधूरा काम, घटिया निर्माण और लापरवाही ने योजना की साख पर सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

गौरतलब होगा कि विभाग इस गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई करता है या फिर रिपेयरिंग का जामा पहनाकर योजना की खामियों पर पर्दा डालने की कोशिश करता है।

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