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: जानिए उस जगह के बारे में, जहां हुआ था लव-कुश का जन्म

Ghansyam Sharma / Sun, Apr 25, 2021 / Post views : 286

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अगर आपने रामायण देखी होगी तो आपको यह पता होगा कि जब भगवान राम ने सीता का त्याग किया था, उस समय वह गर्भवती थी। बाद में ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में उन्होंने शरण ली थी और वहीं पर लव-कुश का जन्म हुआ था।

रामायण तो अधिकतर लोगों ने देखी-पढ़ी या सुनी है। भगवान श्री राम और सीता के दो सुपुत्र लव और कुश के बारे में भी हर कोई जानता है। अगर आपने रामायण देखी होगी तो आपको यह पता होगा कि जब भगवान राम ने सीता का त्याग किया था, उस समय वह गर्भवती थी। बाद में ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में उन्होंने शरण ली थी और वहीं पर लव-कुश का जन्म हुआ था। लेकिन क्या आपको यह पता है कि ऋषि वाल्मीकि का यह आश्रम कहां पर था और अब वर्तमान में यह स्थान कहां स्थित है। शायद नहीं। तो चलिए आज हम आपको उस स्थान के बारे में बता रहे हैं-

यूपी में है यह स्थान

आपको शायद पता ना हो लेकिन ऋषि वाल्मीकि का आश्रम वर्तमान युग के अनुसार उत्तरप्रदेश में स्थित था। यह आश्रम कानपुर शहर से करीबन 17 किलोमीटर दूर बिठूर गांव में स्थित है। बिठूर गंगा के दाहिने किनारे पर स्थित है, और हिंदू तीर्थयात्रा का एक केंद्र है। ऐसा कहा जाता है कि यह वहीं आश्रम है, जहां पर बैठकर ऋषि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी। बिठूर भले ही एक छोटा सा गांव है, लेकिन लव-कुश का जन्म स्थान माना जाने वाला यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है। साथ ही यहां पर आने वाला हर व्यक्ति इस जगह का दर्शन अवश्य करता है।

स्थित है वाल्मीकि आश्रम

बिठूर में आज भी वाल्मीकि आश्रम के निशान देखे जा सकते हैं। यह हिन्दू धर्म और पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बेहद ही महत्वपूर्ण स्थान है, यहां पर माता सीता के अपने जीवन का एक लम्बा समय व्यतीत किया। इसके अलावा, यह लव-कुश की जन्मस्थली है और यहीं पर रामायण भी लिखी गई। साथ ही लव-कुश ने इसी स्थान पर ऋषि वाल्मीकि से शिक्षा भी प्राप्त की थी। इसके अलावा यहां पर राम जानकी मंदिर व लव-कुश मंदिर भी है।

यहीं पकड़ा था अश्वमेघ यज्ञ का अश्व

भगवान राम के अश्वमेघ यज्ञ के अश्व को भी लव-कुश ने बिठूर में ही पकड़ा था। वाल्मीकि जी की रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। बाद में जब राम भक्त हनुमान यहां अश्व को छुडाने के लिए आये थे, तो वे भी लव-कुश से परास्त हो गए थे और लव-कुश ने उन्हें बंधक बना लिया था। इस गांव में आज भी उस स्थान को देखा जा सकता है, जहां पर लव-कुश ने हनुमान जी को कैद किया था।

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