Ghansyam Sharma / Tue, May 11, 2021 / Post views : 159
सूरजपुर। कोरोना महामारी के इस दौर में जरूरत के हर सामान की कालाबाजारी जिले में धड़ल्ले से चल रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अमला बचाव व रोकथाम कार्यो में इस कदर उलझा हुआ है कि उसें खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी से उत्पन्न हुएं महंगाई का असर तालाबंदी के 13 अप्रैल से जारी आदेश के बाद चंद दिनों के अंदर शहर सहित अन्य स्थानो पर जमखोर सामाग्रियों कि किल्लत बताकर बिक्री करनें में कोई गुरेज नहीं कर रहा है।हाल कुछ ऐसा है कि खाद्य पदार्थों के अलावा वर्तमान समय में बढते संक्रमण से जिलें मे चार हजार से अधिक संक्रमीत मरीजों के साथ संक्रमण की जद में आएं करीब 154 मरीजों की मृत्यु होने के बाद से लोगों में डर व दहशत के आलम का फायदा अवसरवादी तबका बेरोकटोक करनें में मशगुल है।इसमें एक उदाहरण बतौर कोरोना संक्रमित मरीजों को आक्सीजन का स्तर नापने की मशीन आक्सीमीटर जो वर्तमान में सबसे अधिक जरूरत बनकर कोरोना कि दवाओं के साथ उभरा है, लेकिन इस गंभीर हालत में भी अप्रत्यक्ष रूप से कमी बताकर
कही चाईना माडल कहें जाने वाले उपयोगी साबित हो जाएं तो बहुत बड़ी बात है,इसके साथ ही प्रतिष्ठित कंपनियों के आक्सीमीटर कि आपूर्ति मांग अनुरूप नहीं होने से दुगने से अधिक दामों पर बिक्री करनें मे मशगूल है।वहीं दूसरी तरफ जवाबदेह जिले के ड्रग इंस्पेक्टर सार्वजनिक तौर पर लापता हैं।यह आरोप हमारा नहीं वरन जिले के कोयलांचल क्षेत्र अंतर्गत आने वाले विश्रामपुर, भटगांव,जरही, कुम्दा हो या फिर जिले के किसी भी विकासखंड मुख्यालय सहित उसके क्षेत्रों में संचालित दवा दुकानों पर खरीददारी करनें जाने वाला हर दूसरा व्यक्ति की जुबां पर यह बात व आरोप है। हालत ऐसी है कि क्षेत्र में संचालित चंद दवा दुकानों को छोड़कर कहीं और उपलब्ध नहीं है।इसके अलावा जिले में रहने वाले अधिकांश आबादी को ऐसे मसलों पर शिकायत दर्ज करवाने की जरूरत भी होने पर जानकारी के अभाव में स्थित खुद ही समझ सकते हैं।
अगर जिले में जरूरत में शामिल दवाओं को खरीदने के समय अधिक दाम पर बिक्री होने की शिकायत दर्ज कराने के लिए अनेक लोग हैं लेकिन उन्हें यह तक जानकारी नहीं है कि ड्रग इंस्पेक्टर कार्यालय कहा है यह तक अतापता नहीं है।वहीं दूसरी तरफ इस पर कोरोना वायरस के बढते संक्रमण खासतौर पर छोटे निकाय ग्रामीण क्षेत्रों में जिस रफ्तार से है।उसके अनुसार जिला प्रशासन तक इस गंभीर मसले पर चुपचाप बैठे हुए हैं।उसने भी दवा दुकानों पर कोरोना के शुरुआती लक्षण का एहसास होने पर दवा उपयोग से संबंधित आदेश तो जारी कर दिया है लेकिन इस दरम्यान किस दर पर बिक्री हो रहा है जिलें मे इसकी उपलब्धता मेडिकल स्टोर पर कितनी है।ऐसे तमाम मुद्दों पर गंभीर नहीं है ना ही ड्रग इंस्पेक्टर कि उपस्थित का एहसास दुकानदारों को व आमजन को है। जैसे जैसे संक्रमण बढ रहा है और इसकी जरूरत बढ रही है अचानक बाजार में जिला मुख्यालय में ही चंद दुकानों के अलावा इसकी मांग बढऩे पर जहां अधिकतर दवा दुकानों में आक्सीमीटर मिल ही नहीं रही है वहीं जहां कुछ आक्सीमीटर है भी वहां दुकानदार खुलेआम इसे एमआरपी से अधिक दामों पर बिक्री करनें में खुद को महंगे दामों पर खरीदारी व कमी बताकर लोगों से मनमाफिक पैसे लेने में लोगो की मजबूरी का फायदा उठाकर इसे बेच रहे हैं और खरीदी करना जरूरमंदो को पड़ रहा हैं। आपको बताते चलें कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में आक्सीजन की भारी कमी का सामना पूरे देश के अस्पतालों में जिस कदर समाचार पत्रों व समाचार प्रसारण के अन्य माध्यम से जंगल में लगी आग समान फैल रही है और इस त्रासदी के कारण शरीर में आक्सीजन की कमी होने के मामले को जानने हेतू शरीर में आक्सीजन का स्तर जांचने के लिए आक्सीमीटर का प्रयोग किया जाता है जिससे शरीर में सामान्य से कम आक्सीजन होने का पता चलते ही उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी जाती है। वर्तमान में कई लोग अपने घरों में ही आक्सीजन का स्तर जांचने के लिए आक्सीमीटर खरीदने लगे हैं। जिससे बाजार में इसकी मांग बढने से बिक्री में भी इजाफा होने लगा है। अब हालात यह है कि कई दवा दुकानों में तो आक्सीमीटर खोजे नहीं मिल रहा है, वहीं कुछ गिने-चुने दुकानों में यह उपलब्ध भी है तो वहां पर दुकान संचालकों ने इसे आपदा को अवसर की तरह भुनाते हुए कंपनी द्वारा तय मुल्य अर्थात अधिकतम खुदरा दर से भी डेढ से दुगना दरो पर बेचने का काम प्रारंभ कर दिया है। अनेक लोगों ने इस मसले पर बताया कि शहर के 70 प्रतिशत से अधिक दवा दुकानों में आक्सीमीटर खोजे नहीं मिल रहा है और जहां मिल रहा है वहां पर दुकानदार खुलेआम दुगनी कीमत तक वसूल रहे हैं, मजबूरीयो में आक्सीमीटर को डेढ से दुगनी कीमत पर खरीदने को मजबूर हैं। यही हाल लगभग हर उस व्यक्ति का है जिसे वर्तमान में आक्सीमीटर की आवश्यकता पड़ रही है। एक हजार रुपये है बाजार भाव लेकिन डेढ से ढाई हजार तक ग्राहक और उसकी मजबूरीयो को भाप कर रहे है बिक्री- अबतक प्राप्त जानकारी अनि आक्सीमीटर का बाजार भाव एक हजार रूपये के आसपास होता है, परन्तु वर्तमान में इसे दुकानदार खुलेआम दो हजार रूपये में बेच रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि ऐसे ही बिक रहा है लेना है तो लो नहीं तो अपना रास्ता नापो। अब ऐसे में मजबूर आदमी मरता क्या ना करता सो दुगनी कीमत पर आक्सीमीटर लेकर घर जा रहा है।वहीं दूसरी तरफ जानकारो कि माने तो शरीर मे यदि आक्सीजन का लेवल 94 है तो यह स्वस्थ्य शरीर को दर्शाता है 90 से 93 के बीच का लेवल भी व्यक्ति के लिए ठीक है परन्तु इससे 80 से 89 के बीच के आक्सीजन लेवल वाले को चिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए वहीं 94 से अधिक आक्सीजन लेवल होने पर इसे भी अच्छा ही माना जाता हैं। वर्तमान में सबसे ज्यादा चर्चा आक्सीजन की कमी को लेकर ही हो रही है, ऐसे में आक्सीमीटर की बिक्री को लगे पंख के कारण ही बाजार में इसकी कालाबाजारी होने लगी है और अब लोग इस कालाबाजारी से बेखबर प्रशासन से ही कालाबाजारी पर रोक के लिए आस भी लगाए बैठे हैं।
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