Ghansyam Sharma / Wed, Aug 27, 2025 / Post views : 186
फरसगांव । पत्रिका लुक
फरसगांव ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कन्हारगांव, मोदेबेड़मा, परोदा, गवाड़ी, छिंदलीबेड़ा, बंजोड़ा सहित कई गांवों के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधा के अभाव में मजबूरन अपनी जान जोखिम में डालकर देवगांव नाला पार करने को विवश हैं। वर्षों से यह नाला इन गांवों की जीवन रेखा और बाधा दोनों बना हुआ है। बरसात के मौसम में जब नाले में तेज बहाव के साथ पानी भर जाता है, तब यहां से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं होता। यही कारण है कि ग्रामीणों के द्वारा प्रशासन से स्थायी पुलिया निर्माण की मांग बार-बार दोहरा रहे हैं।
बरसात में कट जाता है संपर्क
ग्रामीणों का कहना है कि नाले पर पुलिया न होने के कारण बारिश के दिनों में उनका जिला मुख्यालय और अन्य कस्बों से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना चुनौती बन जाता है। मरीजों को इलाज के लिए ले जाना बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमार मरीजों को घंटों तक नाले के पानी के उतरने का इंतजार करना पड़ता है।
अस्थायी पुलिया से मंडराता खतरा
स्थायी पुलिया की अनुपस्थिति में ग्रामीण लकड़ी से अस्थायी पुलिया बनाकर नाला पार करते हैं। यह पुलिया बेहद कमजोर और असुरक्षित होता है। कई बार पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने से लोग पानी में गिरने से बाल-बाल बचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बरसात में उन्हें डर सताता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
ग्रामीणों की गुहार
कन्हारगांव के एक ग्रामीण ने बताया कि “नाले में पुलिया बन जाना हमारे लिए बहुत बड़ी राहत होगी। अभी बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं, महिलाएं और बुजुर्ग नाले को पार करने में सबसे ज्यादा परेशानी झेलते हैं।” इसी तरह परोदा गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, “कई बार नाले के कारण लोगों की जान पर बन आती है। हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी समस्या पर ध्यान देगी।”
प्रशासन की चुप्पी
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार पंचायत और ब्लॉक स्तर पर इस समस्या को उठा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया, पर नाले पर पुलिया निर्माण का काम आज तक शुरू नहीं हुआ।
विकास के दावे पर सवाल
एक ओर सरकार ग्रामीण अंचलों में सड़क और पुल-पुलिया निर्माण का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर आज भी कई गांव नाले के इस पार से उस पार जाने के लिए जुगाड़ पर निर्भर हैं। यह हालात विकास के दावों पर सवाल खड़े करते हैं।
ग्रामीणों की अपेक्षा
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, क्षेत्रीय विधायक और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर देवगांव नाले पर स्थायी पुलिया निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे
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