Ghansyam Sharma / Sun, Aug 7, 2022 / Post views : 200
कोंडागांव पत्रिका लुक।
राज्य सरकार के विकास के दावे उस समय फेल हो जाते हैं जब एक गर्भवती महिला को लाने एम्बुलेंस उसके घर तक नहीं पहुंच पाती। एम्बुलेंस तक पहुंचने के लिए परिजनों को डोली बना कर गर्भवती महिला को एम्बुलेंस तक पहुंचाने को मजबूर होना पड़ता हैं। अंदरूनी गांवों से आने वाली यह तस्वीर आम है, क्योंकि अधिकांश गांवों तक पहुंच मार्गो का अभाव है कीचड़ से सनी कच्ची पगडंडियों के कारण गांवो तक एंबुलेंस व अन्य वाहने नहीं पहुंच पाती हैं,कीचड़ युक्त कच्ची पगडंडी ही ग्रामीणों के मुख्य मार्गो तक निकलने का एकमात्र जरिया होता है,एसे में उन गांवो में निवासरत परिवारो का कोई सदस्य बीमार या प्रसव पीड़ा आदि होने की स्थिति में मुख्य मार्गो तक पहुंचाने ग्रामीण लकड़ी व रस्सी के सहारे डोली बना उपयोग करते हैं। 
ऐसे ही एक मामला ग्राम मथनीबेड़ा से शुक्रवार को सामने आया। वनशिरषी पंचायत के आश्रित ग्राम मंथनी बेड़ा निवासी गर्भवती महिला सुंदरी पति पंडो उम्र 25 वर्ष को प्रसव पीड़ा होने से स्वजनों ने 102 महतारी एंबुलेंस को संपर्क किया। महतारी वाहन पायलट खेम सिंह नेताम व ईएमटी अजय निर्मल वाहन लेकर गांव के लिए निकले लेकिन जंगल के आगे कच्चा रास्ता होने से वाहन घर से लगभग एक किलोमीटर दूर रास्ते मे खड़ी कर महतारी के कर्मचारी पैदल ही पीड़िता के घर पहुंचे और स्वजनों के साथ मिलकर खाट को लकड़ी व रस्सी के सहारे बांध डोली में महिला को एंबुलेंस वाहन तक पहुंचाए जहां से महिला को जिला चिकित्सालय लाया गया ,जहां महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
अजय निर्मल, ईएमटी महिला को डोली के सहारे लगभग 1 किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक लाए और चिकित्सालय पहुंचाया ,महिला ने बच्ची को जन्म दिया, बच्चा जच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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