Ghansyam Sharma / Sun, May 25, 2025 / Post views : 169
बस्तर बना संस्कृति, सहभागिता और विकास का मॉडल
रायपुर। पत्रिका लुके
दिल्ली स्थित अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रस्तुत ‘बस्तर मॉडल’ ने सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से सुशासन, जनभागीदारी और सांस्कृतिक संरक्षण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन कर योजनाओं की निगरानी अटल मॉनिटरिंग पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए की जा रही है। इससे शिकायतों का समाधान समयबद्ध ढंग से हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल योजनाएं नहीं बनाती, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता और ईमानदारी से लागू करने पर जोर देती है।
बैठक में बस्तर ओलंपिक पर विशेष प्रजेंटेशन हुआ, जिसमें बताया गया कि 7 जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन अब सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति बन गया है, जिसने युवाओं को हिंसा से हटाकर खेलों की ओर प्रेरित किया है। पारंपरिक खेलों के माध्यम से चार श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। मुख्यमंत्री ने पुनेन सन्ना जैसे प्रतिभागी का उदाहरण दिया, जो अब व्हीलचेयर दौड़ में पदक विजेता हैं।
इसी प्रकार, बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से राज्य सरकार ने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षण और राष्ट्रीय पहचान दी है। इसमें 1,885 ग्राम पंचायतों से 47,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, गीत, हाट-बाजार और पकवान प्रतियोगिताओं ने इस उत्सव को एकता, पहचान और विकास का प्रतीक बना दिया। प्रतिभागियों को 2.4 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन पहलों की सराहना करते हुए इन्हें अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि बस्तर मॉडल जैसे नवाचार, जो समाज की जड़ों से जुड़े हैं, उन्हें अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की नई शुरुआत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन