Ghansyam Sharma / Sat, Sep 13, 2025 / Post views : 188
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
मेरी बेटी को बचा दो साहब…— यही गुहार लगा रही थी देवकी नेताम। लेकिन अब उनकी आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। शनिवार सुबह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मासूम गंगा ने दम तोड़ दिया।
ग्राम बोटीकनेरा निवासी साढ़े छह साल की गंगा नेताम सिकलिन रोग से पीड़ित थी और उसे हर महीने खून चढ़ाना पड़ता था। परिजन सोमवार को उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे। गंगा की माता-
पिता का आरोप है—“डॉक्टरों ने कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। इसके पहले उसे बेहोशी की दवा दी गई, लेकिन मेरी बच्ची फिर कभी होश में नहीं लौटी। वह बिल्कुल ठीक-ठाक आई थी, अस्पताल में भर्ती हुई और फिर मेरी गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई।
शनिवार सुबह परिजनों को सूचना मिली कि गंगा अब इस दुनिया में नहीं रही। अचानक हुई इस मौत से पूरा परिवार बेसुध है। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई।
बेटी को खो चुकी देवकी नेताम रो-रोकर कहती हैं—डॉक्टरों ने ही मेरी बच्ची की जान ले ली। परिजनों ने दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
मृतक गंगा की असमय मौत से पूरा गांव गमगीन है। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व जिला अध्यक्ष कंग्रेस झुमुकलाल दिवान ने कहा कि जिला अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही लगातार मरीजों की जान ले रही है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा—सरकार केवल स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर दावे करती है, लेकिन हकीकत यह है कि गरीब परिवार अपनी संतान को अस्पतालों में खो रहे हैं।” उन्होंने मृतका के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा, लापरवाह डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज करने और बर्खास्तगी की कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जनाने के लिए प्रेम कुमार मंडावी सिविल सर्जन जिला अस्पताल कोण्डागांव को लगातार फोन लगाने के बाद भी उन्होंने फोन रिसीव ही नही किया।
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