Ghansyam Sharma / Fri, Nov 26, 2021 / Post views : 157
देशवती पटेल "देश”
आईना करती है मुझसे बातें,
देती है मुझे हर रोज़ नई सौगातें।
आइना मुझे देखती है,
मैं आइना को देखती हूं।
हम दोनों करते हैं एक-दूसरे से बातें,
आइना देती है मुझे हर रोज़ नई सौगातें।
मैं खुद को निहारती संवारती हूं,
जब जब आइना देखती बदन सजाती हूं।
मेरी श्रंगार में कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई,
मैं इठलाती हुई पुनः खुद को परखती हूं।
वो मुझे देख मुस्काती मैं उसे देख मुस्काती,
जब कभी मैं रोती हूं वो भी मुझे देख रोती ।
हम हम एक-दूसरे के हैं साथी बन जाते।
आइना देती है मुझे हर रोज़ नई सौगातें।
काश। कि चरित्र भी दिख जाती आइने में,
हम असल शुद्धता पा जाते सही मायने में।
जिस तरह हम चेहरे देखते हैं आईने में।
स्वभाव भी निहारें आत्मा की आईने में।
स्वभाव भी निहारें आत्मा की आईने में।
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