Ghansyam Sharma / Sat, Sep 27, 2025 / Post views : 210
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
झोलाछाप डॉक्टर के इलाज ने एक बार फिर मौत का तांडव दिखा दिया। आड़काछेपड़ा वार्ड निवासी बालाराम बंजारे (60) की मौत ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता ने एक जिंदगी निगल ली।
मिली जानकारी के अनुसार, बालाराम बंजारे मामूली टॉन्सिल की शिकायत लेकर फर्जी डॉक्टर निखिल सिकदार के पास पहुंचे थे। इलाज के दौरान उसने उन्हें इंजेक्शन लगाया, जिसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। मुंह से झाग निकलने लगा और वे बेहोश हो गए। परिजन आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मृतक के भतीजे दिनेश और विशाल बंजारे का कहना है कि निखिल सिकदार कई वर्षों से बिना डिग्री और लाइसेंस के इलाज कर रहा है। उसका क्लिनिक कलेक्टर कार्यालय के सामने खुलेआम संचालित होता है। उसकी पत्नी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम है और इसी प्रभाव का सहारा लेकर वह वर्षों से इलाज करता आ रहा है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि उसका हौसला दिन-ब-दिन बढ़ता गया।
घटना के बाद निखिल सिकदार ने कैमरे के सामने यह स्वीकार किया कि उसने इंजेक्शन लगाया था और उसके पास किसी भी तरह का वैध चिकित्सकीय लाइसेंस नहीं है।
परिजनों ने शाम 6 बजे का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें मृतक बालाराम बंजारे समाज के लोगों के साथ फिल्म देखने जाते हुए पूरी तरह स्वस्थ नजर आ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि यह वीडियो साफ तौर पर साबित करता है कि उनकी मौत झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना इलाज से हुई है।
इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं, तब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की? अब जबकि मौत जैसी गंभीर घटना हो चुकी है, प्रशासन किस स्तर की कार्रवाई करेगा, यह देखना होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन आखिर कब जागेगा और झोलाछाप डॉक्टरों पर नकेल कसने की ठोस कार्रवाई करेगा?
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