Ghansyam Sharma / Thu, Mar 3, 2022 / Post views : 165
तहसीलदार द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र होने के बाद भी, बता दिया अन्य ग्राम की निवासी
परि.अधि.एकी.बाल विकास परियोजना कोण्डागांव- 03 का आपराधिक कारनामा
कोंडागांव पत्रिका लुक।
कहते हैं झूठ बोलकर या दस्तावेज झूठा साबित कर कोई कबतक बच सकता है। एक एक दिन सच्चाई सबके सामने आ ही जाता हैं ऐसा ही एक दस्तावेज सूचना के अधिकार में एक सामाजिक कार्यकर्ता व प्रेस प्रतिनिधि शैलेश शुक्ला ने एकीकृत बाल विकास परियोजना कोण्डागांव- 03 से सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार परियोजन अधिकारी बाल विकास परियोजना कोण्डागांव- 03 के द्वारा पात्र होने के बाद भी भर्ती को निरस्त करना कहि ना कहि साजिश होने की संभावना को दर्शाता।
विभाग से मिले दस्तावेजों के आधर पर
आंगन बाड़ी कार्यकर्ता हेतु एकमात्र पात्र आवेदिका को तहसीलदार द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र होने के बाद भी अन्य ग्राम की निवासी बताकर अपात्र करते हुए एक लोक सेवक परि.अधि.एकी.बाल विकास परियोजना कोण्डागांव- 03 द्वारा आंगन बाड़ी कार्यकर्ता भर्ती को ही निरस्त कर आपराधिक कृत्य किए जाने का एक मामला सामने आया है। उक्त मामले की जानकारी देते हुए जिले के सामाजिक कार्यकर्ता और प्रेस प्रतिनिधि ने बताया कि विगत कई वर्शों से आंगन बाड़ी कार्यकर्ता विहीन आंगन बाड़ी केंद्र पटेलपारा छोटे कुरुशनार, ग्राम पंचायत बड़े कुरुशनार, तहसील व जिला कोण्डागांव में आंगन बाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति नहीं किए जा सके होने के एक मामले में परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना कोण्डागांव- 03 से आर.टी.आई.से प्राप्त समस्त दस्तावेजों का अवलोकन करने और यह सिद्ध होने पर कि उक्त आंगन बाड़ी केंद्र में आं.बा.कार्यकर्ता हेतु एकमात्र पात्र आवेदिका को ही लोक सेवक के द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपात्र बताने के साथ ही उक्त केंद्र हेतु सभी आवेदिका अन्य ग्राम बड़े कुरुशनार के होने कारण इस केंद्र की नियुक्ति को ही निरस्त कर दिए होने के सम्बन्ध में उनके द्वारा समस्त दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर सिटी कोतवाली कोण्डागांव में पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने हेतु आवेदन देने का प्रयास किया गया, जहां डे आॅफिसर द्वारा कहा गया कि विभागीय मामला है सिधे एफआईआर दर्ज नहीं किया जा सकता। जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा पुश्पेंद्र कुमार मीणा कलेक्टर कोण्डागांव एवं हेम राम राना जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय महिला बाल विकास विभाग जिला कोण्डागांव (छ.ग.) के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत करके आंगन बाड़ी कार्यकर्ता पद हेतु पात्र आवेदिका को अपात्र बताकर क्षति कारित करने के आषय से जानबूझकर अषुद्ध दस्तावेज तैयार करके, आवेदिका को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले गंभीर मामले में 7 दिवस में जांच करके, आपराधिक कृत्य करने वाले ठकेष्वर कुमार लांझे के विरुद्ध तत्काल एफ.आई.आर.दर्ज कराने की मांग करने के साथ ही विषेश टीप में इस बात का भी लेख कर दिया गया है कि सम्बन्धित उच्चाधिकारियों के द्वारा आवेदन पत्र प्राप्ति दिनांक से एक सप्ताह के भीतर गंभीर मामले की जांच कराकर लोक सेवक ठकेष्वर कुमार लांझे परि.अधि.एकी.बाल विकास परियोजना कोण्डागांव- 03 के विरुद्ध एफ.आई.आर.दर्ज कराने की कार्यवाही समय सीमा में नहीं करने पर, आवेदक के द्वारा सिटी कोतवाली कोण्डागांव में स्वतः ही सम्बन्धित अधिकारियों के विरुद्ध एफ.आई.आर.दर्ज करने हेतु आवेदन प्रस्तुत कर एफ.आई.आर.दर्ज कराया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता और प्रेस प्रतिनिधि शैलेश शुक्ला द्वारा आरटीआई में मिले ठोस व स्पष्ट साक्ष्यों के बारे में जानकारी देते बताया गया है कि विगत कुछ वर्श पूर्व से आं.बा. कार्यकर्ता विहीन आं.बा.केंद्र पटेलपारा छोटे कुरुशनार ग्राम पंचायत बड़े कुरुशनार तह. व जिला कोण्डागांव में रिक्त आं.बा.कार्यकर्ता पद पर नियुक्ति हेतु ज्ञापन जारी होने के बाद 10 आवेदिकाओं ने आवेदन पत्र प्रस्तुत किए थे, आवेदन पत्रों सहित सन्लग्न आवष्यक सभी दस्तावेजों की जांच के बाद परिषिश्ट- 4, आं.बा.कार्यकर्ता पद हेतु जारी अनंतिम सूची एवं मूल्यांकन पत्रक के सरल क्रमांक 06 में दर्शित आवेदिका को प्रमाणों के आधार पर पात्र तथा षेश सरल क्रमांक 01 से 05 तथा 07 से 10 तक दर्शित आवेदिकाओं को अन्य ग्राम के निवासी होने के प्रमाणों के आधार पर अपात्र दर्षाया गया। लेकिन वहीं परिषिश्ट- 4, आं.बा.कार्यकर्ता पद हेतु जारी अंतिम सूची एवं मूल्यांकन पत्रक के सरल क्रमांक 01 से 05 तथा 07 से 10 तक दर्शित आवेदिकाओं सहित सरल क्रमांक 06 में दर्शित आवेदिका को भी अन्य ग्राम की निवासी होने का लेख करके सभी 10 आवेदिकाओं ही अपात्र दर्षाते हुए उक्त केंद्र में आं.बा.कार्यकर्ता की नियुक्ति को ही निरस्त कर दिया गया। वह भी तब जबकि उक्त आं.बा.केंद्र हेतु एकमात्र पात्र आवेदिका के द्वारा ग्राम छोटे कुरुशनार की निवासी होने का तहसीलदार कोण्डागांव द्वारा 2011 में जारी निवास प्रमाण पत्र लगाया गया है। यह भी कि आं.बा.कार्यकर्ता हेतु एकमात्र पात्र उक्त आवेदिका वर्श 2011 से ही उसी आं.बा.केंद्र में सहायिका के पद पर कार्यरत भी है।
अब देखने वाली बात यह है कि सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा ठोस एवं स्पश्ट साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत उक्त लिखित आवेदन पत्र पर कलेक्टर एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी क्या और कब तक कार्यवाही करते हैं ?
नही लिखी गई FIR
पुलिस थाना कोंडागांव में उक्त विभाग के अधिकारी के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता व प्रेस प्रतिनिधि के द्वारा ठोस विभागीय दस्तावज सबूत देने के बाद भी FIR नहीं लिखा जाना बेहत दुःख बात है। खैर सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा कलेक्टर व जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग को 7 दिवस में जांच के उपरांत उक्त अधिकारी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आवेदन दिया है। बरहाल देखना होगा कि जिला अधिकारियों को उक्त अधिकारी के खिलाफ दिये गए आवेदन पर गम्भीरता पूर्वक कार्यवाही करते हैं या फिर अपने अधीनस्थ अधिकारी को बचाने का प्रयास होगा या कार्यवाही यह तो आने वाला समय ही तय करेगा।
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