Ghansyam Sharma / Thu, Aug 11, 2022 / Post views : 157
जिला प्रशासन व राज्य सरकार से करती निवेदन दे दे सरकारी नौकरी ताकि बोझ ना बनू बूढ़े माँ बाप पर
कोंडागांव पत्रिका लुक।
एक ऐसी विकलांग बहन जिनके दोनों हाथ नहीं पर 12 साल से अपने भाई के कलाई में विकलांग हाथों से राखी बांध रही है। यह कहानी नहीं हकीकत है। कोंडागांव जिले के ब्लॉक फरसगांव से 15 किमी दूर बसा ग्राम पंचायत बड़े डोंगर के भैसाबेड़ा पारा की, जिसके जन्म से ही विकलांग हाथ हैं जिसके बावजू वो राखी के दिन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना नहीं भूलती।

कहते हैं तकदीर की लकीर हाथो में होती हैं पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनको ऊपर वाले ने हाथ नहीं दिया । वे लोग अपनी हाथों की लकीरों के भरोसे नही बल्कि मेहनत कर अपनी तकदीर बनाने लगे हैं । ऐसा ही एक कोंडागांव जिला व फरसगांव ब्लाक अंतर्गत आने वाला ग्राम ग्राम पंचायत डोंगर के ग्राम भैसाबेड़ा पारा की रहने वाली मनिषा माझी की कहानी है । मनीषा माझी जन्म से दोनों हाथ नहीं है पर वह पढ़ाई में होशियार है और 12वी में 71%अंक हासिल कर फास्ट डिवीजन आई हैं ।

हर सालकी भाती इस वर्ष भी रक्षा बंधन के दिन अपने बड़े व छोटे भाई को रक्षा बंधन के पवित्र धागे को बांधकर प्यार व स्नेह मांग हैं । वे बताती है कि ईश्वर ने सब कुछ दिया पर हाथ नहीं दिया, वह शिकायत भी करती है भगवान से पर कहते हैं ना ऊपर वाले के आगे हर कोई कुछ भी नहीं ।

मनीष कहती है कि हाथ नहीं होने से रोज-मरा जीवन में बहुत कठिनायों उठानी पड़ती है लेकिन फिर भी हौशला नही हारी हूं।
मेरे माता पिता भाई बहन सब का सहयोग मिलता है और हौशला अफजाई करते हैं तभी में आज 12वी में फास्ट डिविजन से पास हुई हु। पर सरकार के द्वारा हर माह मात्र 5 सौ रुलाये विकलांगता पेंशन दिया जा रहा है पर आज के महंगाई के दौर में 5 सौ रुपये कुछ नहीं हैं, अगर सरकार को देना है तो मुझे सरकारी नौकरी दे देते मैं अपने परिवार पर बोझ ना होती। राज्य सरकार व जिला प्रशासन से निवेदन करती हैं कि वे जीवन यापन के लिए एक सरकारी नौकर देते तो मुझ पर महरबानी होती।

मनीषा के माता पिता ने कहा बताया कि हम लोग मजदूरी कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं पर कई बार रोजगार नहीं मिलने से पर परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। मनीष बड़ी हो गई है पर इससे शादी भी कौन करेंगा क्यों कि इसके दोनो हाथ नहीं है। सरकार से निवेदन करते है कि वे उसकी बेटी को सरकारी नौकरी दे दे जिससे वह अपना आगे का जीवन जी सके।
लेखन- घनश्याम शर्मा
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