Ghansyam Sharma / Thu, Aug 28, 2025 / Post views : 174
लाखों रुपये खर्च के बावजूद खिलाड़ियों को जर्जर हाल में ठहराया गया, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने जताई नाराज़गी
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने और उन्हें बेहतर मंच देने के लिए किया जाता है, लेकिन कोण्डागांव में बुधवार रात हुई घटना ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। रायपुर संभाग से आए खिलाड़ियों पर देर रात लगभग 12 बजे मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। यह हमला आदेश्वर पब्लिक स्कूल परिसर में हुआ, जहां खिलाड़ियों को ठहराया गया था।
खिलाड़ियों को जिस हाल में ठहराया गया, वह जर्जर टीन शेड से बना था। रात में अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने वहां सो रहे खिलाड़ियों को निशाना बनाया, जिससे तीन खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि अन्य खिलाड़ी डरे और सहमे रहे। घटना के बाद घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
बेहतर कमरे खाली, फिर भी जर्जर हाल में ठहराए गए खिलाड़ी
इस घटना ने प्रबंधन और आयोजन समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में बेहतर कमरे उपलब्ध थे, लेकिन खिलाड़ियों को उनमें ठहराने के बजाय उपेक्षित और असुरक्षित हाल में रखा गया। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताई। उनका कहना है कि यह सीधी-सीधी लापरवाही है, जिसका खामियाज़ा मासूम खिलाड़ियों को उठाना पड़ा।
लाखों रुपये का खर्च, फिर भी अव्यवस्था
खिलाड़ियों की सुरक्षा और ठहरने की व्यवस्था को लेकर सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि राज्य सरकार और जिला प्रशासन इस तरह के आयोजनों पर हर साल लाखों रुपये खर्च करते हैं। आयोजन के लिए बजट का प्रावधान रहता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब लाखों रुपये का खर्च किया जाता है तो खिलाड़ियों को असुरक्षित हाल में क्यों ठहराया गया? आखिर यह पैसा कहाँ खर्च होता है?
प्रतियोगिता की छवि पर पड़ा सवालिया धब्बा
राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं न सिर्फ खिलाड़ियों की प्रतिभा दिखाने का अवसर होती हैं बल्कि आयोजन स्थल की छवि बनाने का भी मौका होती हैं। लेकिन कोण्डागांव में हुई यह घटना जिले की छवि पर धब्बा बन गई है। खेल संघ से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ती हैं और उनकी खेल प्रतिभा पर नकारात्मक असर डालती हैं।
प्रशासन की चुप्पी
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने खिलाड़ियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की बात कही है, लेकिन अब तक इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या आयोजन समिति के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावकों का कहना है कि जब तक ऐसी घटनाओं पर सख्ती से जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
भविष्य को लेकर सवाल
इस घटना ने न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा बल्कि पूरे आयोजन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जिला प्रशासन अब खिलाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगा? क्या खेल विभाग इस घटना की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा? ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब खिलाड़ी, अभिभावक और स्थानीय लोग तलाश रहे हैं।
राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य खिलाड़ियों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देना है। लेकिन कोण्डागांव में हुई मधुमक्खियों के हमले की घटना ने साबित कर दिया है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद व्यवस्थाएं लचर हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे आयोजन खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन की जगह डर और अविश्वास का कारण बन जाएंगे।
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