Ghansyam Sharma / Thu, Jul 21, 2022 / Post views : 137
BRGF योजना की राशि से 3 HP मिनी राइस मिल खरीदी का मामला। जिला पंचायत सीईओ द्वारा बन्द पड़ी BRGF योजना की राशि को 49 ग्राम पंचायतों को किया जारी, एक ही फर्म से 3 HP मिनी राइस 98000 रुपये, 5 प्रतिशत GST मिलाकर 1028900 रुपये का भुगतान वह भी उचे भाव में।
कोंडागांव पत्रिका लुक।
कोंडागांव जिला पंचायत में हुए BRGF योजना पर कार्रवाई नही होने से सरकार की करनी ओर कथनी पर उस वक्त प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है जब कोई सरकारी अधिकारी/कर्मचारी भष्ट्राचार को अंजाम दे कर सरकारी खजाने में लूट करता है और प्रशासन जांच के नाम पर फाइले बनाने में समय व्यतीत कर देती है। ऐसा इन लिए कहने को मजबूर होना पड़ता हैं क्योंकि अगर यही भष्ट्राचार कोई आम आदमी के द्वारा किया जाता तो पूरा सरकारी महकमा उस आम आदमी पर चढ़ बैठता ओर वह सलाखों के पीछे नजर आता लेकिन आम और खास (सरकारी) आदमी में यही कानून में अंतर एक खाई समान नजर आता हैं ।
हम बात कर रहे हैं कोंडागांव जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ DN कश्यप की जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार की संचालित BRGF योजना की, केंद्र सरकार के द्वारा BRGF योजना को बन कर योजना की राशि व राशि का ब्याज सहित वापस लौटने को कहा था । लेकिन कोंडागांव के तत्कालीन सीईओ DN कश्यप के द्वारा उस राशि को अपना माल समझते हुए 49 ग्राम पंचायतों को जारी कर दिया गया। ताकि उस BRGF योजना में पड़े करोड़ो रूपये से समान सप्लाई करा कर अपने चाहते सप्लायर व खुद भी मालामाल जो जाए । पर भष्ट्राचार को कब तक छुपाया जा सकता हैं एक न एक दिन उजागर ही जाता है जैसा कि कोंडागांव के तत्कालीन सीईओ DN कश्यप के साथ हुआ।
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकरी से RTI कार्यकर्ता द्वारा यह सबूत दिया जा रहा है कि DN कश्यप व उनके अधीनस्त सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से BRGF योजना की राशि का बंदरबाट किया गया हैं ।
समाचार प्रकाशन व शिकायत के बात तत्कालीन कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने जांच के आदेश जारी किया। आदेश के बाद पर जांच भी हुई पर इस जांच रिपोर्ट को सर्वाजनिक नहीं करते हुए जांच रिपोर्ट को राज्य शासन के पास भेजा गया बताया जा रहा है । राज्य शासन द्वारा BRGF योजना पर अब तक कार्रवाई के आदेश जारी नहीं हुआ है। 
कानून व्यवस्था में सबसे सटीक व तत्काल कार्रवाही अगर कोई करता है तो वह एंटी करप्शन ब्यूरो के द्वारा उनके द्वारा दिए गए नोटों को भष्ट्र अधिकारी अन्य किसी को रंगे हाथ पकड़ते ही कार्रवाई हो जाती है और वह जेल सलाखों के पीछे पहुंच जाता हैं।
पर सरकारी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी के द्वारा सरकार के खजाने पर घोलमाल कर भष्ट्राचार करता है । सरकारी लिखित दस्तावेज जिन्हें सरकारी कर्मचारियों या अधिकारी ही लिखते है । उसी दस्तावेज के जरिए यह साबित हुआ कि तत्कालीन सीईओ DN कश्यप ने BRGF योजना के पैसे का दुरपयोग करते हुए अनियमितता किया है। कई माह बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन के द्वारा राज्य शासन को भेजे गए जांच प्रतिवेदन पर कार्रवाही या उस पर प्रतिक्रिया जारी नहीं करने से लोगों के बीच कई सवाल खड़े रहे हैं। कब तक घोटाले व भष्ट्राचार करने वाले भष्ट्र कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई करेंगी या फिर अभय दान यह तो आने वाला व्यक्त ही तय करेंगा।
लेखन-घनश्याम शर्मा
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