Ghansyam Sharma / Sun, Oct 25, 2026 / Post views : 2
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत मैनपुर में विजयादशमी के चार दिन बाद दशहरा पर्व मनाने की अनूठी परंपरा है। इस वर्ष भी गांव में उत्साह के साथ दशहरा मनाया गया। यहां बिच्छू, मगरमच्छ और हेलीकॉप्टर जैसी आकर्षक झांकियां लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहीं। इस अनोखे दशहरे को देखने कोण्डागांव सहित नारायणपुर और कांकेर जिले से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।
मैनपुर के दशहरे की खास पहचान यहां निकलने वाली अनोखी झांकियां हैं। गांव के युवाओं ने अपनी रचनात्मकता और मेहनत से बिच्छू, मगरमच्छ और हेलीकॉप्टर जैसी आकृतियां तैयार कीं। पारंपरिक वेशभूषा और अलग-अलग रूपों में सजे पात्रों ने आयोजन को आकर्षक बनाया। विशेष रूप से हेलीकॉप्टर की झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी इन झांकियों को देखने के लिए उत्साहित नजर आए।
गांव के सहयोग से होता है आयोजन
मैनपुर के दशहरे की एक खास बात यह भी है कि आयोजन की तैयारियों में ग्रामीण स्वयं सहयोग करते हैं। गांव के लोग घर-घर जाकर चंदा एकत्रित करते हैं और उसी राशि से रावण निर्माण सहित झांकियों और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी की जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, कोई 100 रुपये तो कोई 1000 रुपये तक सहयोग देता है। सामूहिक भागीदारी से आयोजित होने वाला यह पर्व गांव के आपसी सहयोग और एकजुटता को दर्शाता है।
मोटरसाइकिल से ट्रैक्टर तक निकलती है राक्षसों की टोली
दशहरा आयोजन के दौरान राक्षसों की टोली मोटरसाइकिल से लेकर ट्रैक्टर तक पर सवार होकर निकलती है। अनोखी वेशभूषा, आकर्षक झांकियों और रावण दहन के साथ पूरा माहौल उत्सवमय हो जाता है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस वर्ष आयोजन को देखने करीब 10 हजार से अधिक लोग मैनपुर पहुंचे।
मैनपुर का यह दशहरा अपनी अलग परंपरा, युवाओं की रचनात्मकता और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग के कारण विशेष पहचान रखता है। विजयादशमी के चार दिन बाद आयोजित होने वाला यह पर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक एकता की झलक प्रस्तुत करता है।
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